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महानिदेशक की कलम से

 


छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद
रायपुर, छत्तीसगढ़

मुदित कुमार सिंह
           आई.एफ.एस

(पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख)
महानिदेशक
संदेश

      आज दुनिया के विकास में विज्ञान और प्रौद्योगिकी एक युक्ति और मापदंड है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी हमारे देश में सामाजिक परिवर्तन लाने का माध्यम है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के विविध क्षेत्रों में भारत का योगदान पूर्व-ऐतिहासिक और वैदिक काल से आज तक महत्वपूर्ण है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत अपनी क्षमता, विविध विषयों की प्रभावशाली श्रेणी में, दक्षता के क्षेत्रों और अनुप्रयोगों में प्रस्तुत करता हैं। मौलिक अनुसंधान के क्षेत्र में भारत अग्रणी है, जिसे विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त है। छत्तीसगढ़ में भी विज्ञान और प्रौद्योगिकी का एक स्थायी इतिहास रहा है; जिसके पद चिन्ह अपनी समृद्ध-जीवंत संस्कृति और परंपरा की गहराई में देखा जा सकता है। छत्तीसगढ़ की प्रकृति समृद्ध है जिसमे मुख्य रूप से जनजातीय समुदायों का वर्चस्व है। राज्य अपार समृद्ध जैव विविधता और खनिज संपदा से संपन्न है।

       विज्ञान और प्रौद्योगिकी का प्रभाव प्रशासनिक तत्परता पर संतोषदायक रहा है, और सुशासन के लिए सजीव परिवर्तनों एवं विज्ञान और समाज के बीच एक स्वस्थ अंतर्संबंध स्थापित कर वांछनीय भविष्य सुनिश्चित करना होगा।

       विज्ञान और प्रौद्योगिकी के बदलते ज्ञान क्षेत्र के साथ सामंजस्य बनाये रखने के लिए, राज्य ने वर्ष 2001 में छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद की स्थापना की। इस परिषद के संचालन का उद्देश्य वैज्ञानिकीय गतिविधियों को बढ़ावा देने, लोकप्रिय बनाने और सहयोग करने तथा राज्य में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी अनुप्रयोग कार्यक्रमों का निष्पादित करना हैं। परिषद राष्ट्रीय अधिदेश के निष्पादन के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन, भारत सरकार का केंद्र बिंदु भी है। छत्तीसगढ़ शासन नागरिकों के शारीरिक, मानसिक और सामाजिक कल्याण के उच्चतम स्तर पर उत्थान हेतु स्थानीय समुदायों और नागरिकों को सशक्त बनाने वाली योजनाओ के माध्यम से प्रयास करती है कि राज्य में उन्हें समानता का अधिकार मिले, वे लिंग संवेदनशील हो और राज्य में निर्धनता दूर हो।

       इन वर्षों में परिषद ने राष्ट्रीय और राज्य स्तर के संस्थानों, विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों के साथ नालेज नेटवर्क स्थापित किया है। परिषद राज्य के विकास विभागों को आर एंड डी और अनुप्रयोग उन्मुख तकनीकी सहायता प्रदान करती है। परिषद के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी लोकव्यापीकरण योजनाओ का क्रियान्वयन जनमानस और युवा पीढ़ी में वैज्ञानिकीय ज्ञान का प्रसार, वैज्ञानिकीय जागरूकता लाने तथा वैज्ञानिक सोच विकसित करने के लिए हैं; राज्य के भीतर और बाहर विकसित और उन्नत की गई विभिन्न तकनीकों को लोगों के कल्याण के लिए चयनित तथा प्रयुक्त किया जाता है और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण एवं प्रौद्योगिकी ग्राम कार्यक्रमों के माध्यम से मानव समृधि के लिए नई तकनीकों को अपनाने और अनुकूलन के लिए लोगों को दक्ष और पुनर्दक्ष किया जाता है; राज्य की केंद्रीय प्रयोगशाला राज्य के वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, छात्रों और नवप्रवर्तकों को इंस्ट्रूमेंटेशन एवं इन्क्यूबेशन सुविधा प्रदान कर रही है; पेटेंट सूचना केंद्र, बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPRs) के बारे में जागरूकता पैदा करने, पेटेंट खोजों को सक्षम करने और नवप्रवर्तको को अपनी बौद्धिक संपदा के फाइलिंग के सम्बन्ध में मार्गदर्शन देने हेतु उपलब्ध है; परिषद ने राज्य के सरकारी विभागों और अन्य एजेंसियों को जीआईएस और रिमोट सेंसिंग एप्लिकेशन, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन और राज्य के अन्य अवसंरचनात्मक विकास हेतु राज्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र द्वारा तकनीकी सहायता प्रदान करती है तथा समाज को लाभान्वित करने हेतु परिषद के माध्यम से अन्य वैज्ञानिक कार्यक्रमों और गतिविधियों का संचालन किया जाता है।

       परिषद ने एस एंड टी का समावेश कर अपने निहित उद्देश्यों द्वारा समाज के समग्र विकास हेतु नवाचार और सयुक्त अनुसंधान के समर्थन के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए हैं। परिषद द्वारा राज्य के युवा और ग्रास रूट नवप्रवर्तकों के लिए प्रोटोटाइप विकास और मेंटरशिप के लिए इन्नोवेशन फण्ड कार्यक्रम संचालित है। कार्यक्रम के तहत परिषद वित्तीय एवं मार्गदर्शन सहयोग के अलावा राज्य में सहयोगी संस्थानों के साथ नवप्रवर्तक को प्रयोगशाला की सुविधा प्रदान करती है। परिषद के आर एस एवं जीआईएस प्रभाग द्वारा ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट जैसे अभिनव परियोजना - जैव विविधता संरक्षण और ग्रीन कवर मूल्यांकन और संवर्द्धन के लिए प्रारंभिक अध्ययन के रूप में लिए जाने कि योजना है। इसी तरह के अध्ययन और कार्यक्रम भविष्य के लिए भी योजनाबद्ध हैं।

       अपनी स्थापना के बाद से पूर्व में पं रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय परिसर में स्थित परिषद जो वर्तमान में 4 एकड़ के सुसज्जित भवन परिसर में जिसमे एक छत के नीचे लगभग 10000 वर्ग फीट के निर्माण क्षेत्र में ग्राउंड +4 मंजिलों के आवास क्षेत्र में सभी प्रभाग संचालित है ने महत्वपूर्ण उपलब्धिया हासिल की हैं। प्रारम्भ में राज्य में गतिविधियों की शुरुआत के संदर्भ में परिषद ने स्कूल, महाविद्यालय और विश्वविद्यालय स्तर पर विज्ञान के लोकव्यापीकरण कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित किया। फिर विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के विकास के लिए परिषद ने अनुसंधान एवं विकासीय प्रोत्साहन योजना अंतर्गत लघुशोध परियोजना, सेमिनार / सिम्पोजिया / कॉन्फ्रेन्स को स्वीकृति प्रदान करना आरंभ किया। अब तक इन कार्यक्रमों के माध्यम से लगभग 5 लाख छात्रों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों ने लाभ प्राप्त किया है। परिषद की पहल से स्थापना के बाद से पिछले 20 वर्षों में, प्रमुख कार्यक्रमों में से शुक्र पारगमन खगोलीय घटना को लगभग 1.25 लाख शिक्षाविदों, शासकीय अधिकारियों और सामान्य जन द्वारा देखा गया। रिमोट सेंसिंग और जीआईएस हेतु परिषद में सुसज्जित रिमोट सेंसिंग और जीआईएस लैब है, जो कई राज्य विशिष्ट परियोजनाओं जैसे कि लैंड रिकॉर्डस / नजूल मैप जनेरेशन, वाटरशेड मैनेजमेंट, एसआईएस- डी पी, एग्रीकल्चर रेसिडयु बर्निंग, 11 प्रमुख शहर के मास्टर प्लान, सेरीकल्चर, FASAL प्रोजेक्ट आदि में सहायक हुई। राज्य में विज्ञान लोकव्यापीकरण अंतर्गत परिषद की पहल से साइंस सिटी और रीजनल साइंस सेंटर स्थापित किया गया है। रीजनल साइंस सेंटर एक स्वतंत्र सोसायटी के रूप में कार्य कर रही है और स्कूली छात्रों और जनमानस को लाभान्वित कर रही है। इसके विस्तार के लिए परिषद ने इनोवेशन स्कूल, तारामंडल, खनिज संग्रहालय, साइंस सिटी केटेगरी -'बी' के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है जो राज्य के जनमानस में विज्ञान के प्रसार हेतु नवीन योजना के रूप में प्रस्तावित है।

       परिषद ने आगामी वर्षों में एस एंड टी के क्षेत्र में उन्नयन हेतु राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सममूल्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता केंद्र, वायरोलॉजी अनुसंधान केंद्र और एस एंड टी हस्तक्षेप केंद्रों की स्थापना की परिकल्पना की है। विशेष रूप से राज्य के विकास विभागों के अधिकारियों के लिए सीएलएफ की स्थापना, आरएस एंड जीआईएस प्रशिक्षण केंद्र की स्थापना, औषधीय पौधों, हर्बल दवाओं और एथनो-दवाओं के क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को प्रोत्साहित करना, ग्रास्ररूट इन्नोवेटर्र हेतु अधिक संस्थाओ के साथ अनुबंधन द्वारा इनोवेशन फंड कार्यक्रम का विस्तार नवप्रवर्तक राज्य में एसएंडटी विकास के लिए भविष्य की कुछ योजनाएं हैं।

       परिषद, पीढ़ी की उत्तरोत्तर बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी में बेहतर कुशल मानव संसाधन का उपयोग सभी स्तरों पर करने की दिशा में कार्य कर रही है, जिसका उद्देश्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी के महत्व द्वारा जनमानस की बढती आवश्यकता को पूरा करना है जो समाज पर वैज्ञानिकीय ज्ञान के व्यापक प्रसार का सीधा प्रभाव डालता है।

       परिषद अपने कार्यक्रमों में अन्य गतिविधियों और कार्यक्रमों को सुनिश्चित करने के लिए शासन की नीति अनुरूप सुझाव देती है जो वैज्ञानिक ज्ञान को बढ़ावा देने तथा नवाचार को प्रोत्साहित करते हैं।

मुदित कुमार सिंह
           आई.एफ.एस

(पीसीसीएफ एवं वन बल प्रमुख)
महानिदेशक
छत्तीसगढ़ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद, रायपुर

 

 

 

उपलब्धियां

परिषद की गतिविधियाँ