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संपन्न परियोजनाए

  • फसल क्षेत्र एवं उत्पादन आंकलन (केप) परियोजना

फसल क्षेत्र और उत्पादन आकलन परियोजना

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संस्थान, अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र भारत सरकार द्वारा वित्तीय पोषित उक्त परियोजना के अंतर्गत मुख्य फसल धान (खरीफ) हेतु फसल क्षेत्र एवं उत्पादन आंकलन का कार्य कटाई के पूर्व ही रडार सेट -स्कैनर डाटा का उपयोग कर वर्ष 2002 से 2008 तक परिषद द्वारा कार्य किया गया। उक्त आंकडे़ कृषक, नीति निर्धारकों एवं निर्णायकगणों हेतु अत्यंत उपयोगी सिध्द हुआ है। केप परियोजना अब फसल परियोजना के रुप में परिवर्तित हो चुकी है; जो कि राष्ट्रीय फसल पुर्वानुमान केन्द्र (MNCFC), कुषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा क्रियान्वित है।

  • राजीव गांधी राष्ट्रीय पेयजल योजना फेज 04 के अंतर्गत भूजल उपलब्धता मानचित्रीकरण

भूजल संभावना मानचित्रण

आरजीएनडीडब्ल्यूएम के तहत भूजल संभावना मानचित्रण

भारत सरकार के राजीव गांधी राष्ट्रीय पेयजल योजना के अंतर्गत संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य के 202 प्रभावी टोपोषीट आधारित भारतीय सुदूर संवेदन श्रेणी के उपग्रह चित्र 1C, 1D एवं रिसोर्ससेट का उपयोग करते हुए भूजल समस्याओं वाले मानचित्र के 1ः50,000 स्पेल पर तैयार किये गये हैं। उपरोक्त सभी मानचित्र भूवन पोर्टल पर भूवन भूजल अनुप्रयोग सेक्टर पर उपलब्ध हैं। इन मानचित्रों की सहायता से नलकूप खनन हेतु संभावित क्षेत्रों की पहचान की जाती है एवं असके उपयोग से सफलता का प्रतिषत 80 -85ः तक पहुंच गया है।

  • सेरीकल्चर के विकास में सुदूर संवेदन एवं भौगोलिक सूचना प्रणाली के उपयोग-(प्रथम चरण)

रिमोट सेंसिंग और जीआईएस के आवेदन

यह परियोजना उत्तर-पूर्व अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र, अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एवं केन्द्रीय रेशम बोर्ड के सहयोग से पूर्ण किया गया। इस परियोजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के रायगढ़ एवं बस्तर (जगदलपुर) जिलें में रेशम विकास हेतु उपयुक्त शहतूत बागान क्षेत्रों का चिन्हांकन, उपग्रह छायाचित्रों के विश्लेषण एवं चयनित भूमि सत्यापन के आधार पर, 1ः50000 मापक पर मानचित्रण किया गया है तथा सेरीकल्चर इन्फरमेशन लिंकेज एण्ड नाॅलेज सिस्टम (सिल्क) नामक वेब पोटल तैयार किया गया है। रेशम विकास हेतु उपयुक्त ग्राम, पंचायत, विकासखंड के नाम एवं क्षेत्रों के आंकलन सहित प्रतिवेदन तथा जिलेवार मानचित्र प्रस्तुत किये गये है। इस परियोजना के कार्य से रेशम विकास अधिकारी, जमीनी स्तर के रेशम उत्पादक कृषक, स्व-सहायता समूहों, बैंक और सहकारी समितियाॅ, राज्य शासन के रेशम संचालनालय, केन्द्रीय सिल्क बोर्ड के क्षेत्रीय विकास कार्यालय एवं केन्द्रीय अनुसंधान प्रयोगशालायें लभांन्वित होंगे।

  • नैशनल जियोमाॅर्फोलाॅजिकल एवं लिनीयामेंट मैपिंग

राष्ट्रीय भू-आकृति विज्ञान और रेखागणित मानचित्रण

राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केन्द्र, अंतरिक्ष विभाग, भारत शासन, हैदराबाद द्वारा प्रायोजित परियोजना “नैशनल जियोमाॅर्फोलाॅजिकल एवं लिनीयामेंट मैपिंग“ के अंतर्गत लिस III उपग्रह छायाचित्रों के विश्लेषण एवं चयनित भुमि सत्यापन के द्वारा संपूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य के जियोमोर्फोलोजिकल एवं लिनीयामेंट मानचित्र 1ः50,000 मापक पर तैयार किये गये हैं। इन मानचित्रों के डिजिटल जी. आई. एस. डाटाबेस प्रायोजक संस्थान राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केन्द्र, अंतरिक्ष विभाग, भारत शासन, हैदराबाद को सौंपे गये है। यह मानचित्र राज्य शासन एवं भारत शासन के विभिन्न विभागों द्वारा खनिज अन्वेषण, भू-अभियांत्रिकी, भू-जल अन्वेषण, जल विज्ञान, पर्यावरण अध्ययन, एकीकृत भू एवं जल संसाधन विकास, भुकंपीय पिरदृँय संबंधी अध्ययन आदि कार्यो में उपयोग हेतु Bhuvan जियोपोर्टल पर उपलब्ध हैं।

  • भूमि उपयोग, भू आवरण 1ः50000 मापक पर मानचित्रण (द्वितीय चक्र)

भूमि उपयोग / लैंडवर्कर मैपिंग

राष्ट्रीय एवं राज्य शासन की किसी भी योजना, परियोजना तथा उसका विकास प्रारंभ करने के लिये भूमि उपयोग, भू-आवरण का समय-समय पर कालिक परिवर्तन तथा सीमाओं का विश्वसनीय डाटा बेस अपेक्षित होता है।

राष्ट्रीय सुदूर संवेदन केन्द्र, अंतरिक्षत विभाग, भारत सरकार, द्वारा प्रायोजित इस परियोजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के समस्त 27 जिलों के भूमि उपयोग, भू-आवरण मानचित्र 1ः50,000 मापक पर तैयार किये गये है। यह डाटा बेस राज्य सरकार एवं भारत सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा नगरीय विकास योजना, पर्यावरण, सिंचाई, वन एवं उद्योग आदि क्षेत्रों में उपयोग हेतु भुवन पोर्टर पर उपलब्ध है।

यह परियोजना राष्ट्रीय सूदूर संवेदन, अंतरिक्ष विभाग, भारत सरकार द्वारा प्राकृतिक संसाधनों के सेसंस (एन.आर.सी.) के अंतर्गत प्रायोजित है। इस परियोजना में वर्ष 2011-12 के तीनों ऋतुओं-खरीफ, रबि और जेड के LISS-III आर्थोरेक्टीफाईड् उपग्रह चित्रों का उपयोग कर 1ः50,000 मापक पर छत्तीसगढ़ राज्य के सभी 27 जिलों के भूमि उपयोग, भू-आवरण मानचित्र तैयार किये गये है। यह मानचित्रण विभिन्न उपयोगी संस्थाओं की आवश्यकताओं की पूर्ति हेतु भूमि उपयोग, भू-आवरण के राष्ट्रीय स्तर में वर्गीकरण प्रणाली पर आधारित है।

  • मसुलपानी ग्राम पंचायत, नरहरपुर ब्लाॅक, जिला कांकेर वेब आधारित एसेट मैपिंग

संपत्ति के वेब आधारित भू मानचित्रण

ग्राम पंचायत मसुलपानी नरहरपुर ब्लाॅक, जिला कांकेर का भौगोलिक सूचना प्रणाली का उपयोग करते हुए वेब आधारित एसेट मैपिंग का कार्य ग्रामों की प्लानिंग एवं विकास में सहायता के उद्देश्य से किया गया है।

  • ग्राम चर्रा, ब्लाॅक कुरुद, जिला धमतरी का वेब आधारित एसेट मैपिंग

परिसंपत्तियों और डेटाबेस निर्माण का मानचित्रण

ग्राम चर्रा, ब्लाॅक कुरुद, जिला धमतरी का भौगोलिक सूचना प्रणाली का उपयोग करते हुए वेब आधारित एसेट मैपिंग का कार्य ग्रामों की प्लानिंग एवं विकास में सहायता के उद्देश्य से किया गया है।

  • बहिर परिसर आदरणीय प्रशिक्षण कार्यक्रम हेतु एस.आई.टी. की स्थापना

परिषद के अंतरिक्ष उपयोग केन्द्र में भारतीय सुदूर संवेदन संस्थान (आई.आई.आर.एस.) के सहयोग से वहिर परिसर आदरणीय प्रशिक्षण कार्यक्रम को संचालित करने हेतु सेटेलाइट इंटरेक्टीव टर्मिनल की स्थापना की गई है, जिसके अंतर्गत निम्नलिखित प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं।

"नीचे दिये गए शीर्षकों के लिए वर्तमान में जानकारी उपलब्ध नहीं हैं यह जानकारी अंग्रेजी में प्राप्त करने के लिए अंग्रेजी पृष्ठ पर जाएँ।"

  • नेशनल वेस्टलैंड अपडेटिंग मिशन
  • सतत विकास के लिए समेकित मिशन (आईएमएसडी)
  • राष्ट्रीय भू-आकृति विज्ञान और रेखाचित्र मानचित्रण परियोजना (50,000 मापक पर)
  • विकेंद्रीकृत नियोजन हेतु अंतरिक्ष आधारित सूचना प्रणाली परियोजना (एसआईएस-डीपी)
  • केंद्र द्वारा संरक्षित स्मारकों के जियोटैगिंग और कैडस्ट्रल मैपिंग
  • भूजल संरक्षण और प्रबंधन
  • प्राकृतिक संसाधन मूल्यांकन: भौतिक सुविधाओं और भौगोलिक स्थितियों का सुदूर संवेदन आधारित सर्वेक्षण एवं मानचित्रण: एन.टी.पी.सी, तलाईपल्ली
  • जे. एस. पी. एल के लिए रिमोट सेंसिंग और जी.आई.एस का उपयोग करते हुए भौतिक विशेषताओं का मानचित्रण और भू-स्थानिक सर्वेक्षण
  • नाकोडा ग्रुप के सीजी कोल एंड पावर लिमिटेड के लिए स्थलाकृतिक और बुनियादी ढांचा मैपिंग
  • छत्तीसगढ़ के वनों के लिए 6 सेकंड ग्रिड कोडिंग
  • रायपुर सिटी मास्टर प्लान -2021 का जी. आई. एस रूपांतरण
  • छत्तीसगढ़ राज्य के नवीन एवं विद्यमान भूमि पट्टों के भूमि निर्धारण हेतु डी.जी.पी.एस. सर्वेक्षण
  • KOMPSAT -2 उपग्रह मानचित्रों का ओर्थो-रेक्टीफिकेशन
  • राज्य में स्वचालित मौसम स्टेशनों की स्थापना के लिए तकनीकी सहायता
  • संरक्षण के लिए झीलों का चयन करने के लिए वन विभाग को तकनीकी सहायता
  • फसल के अवशेषों को जलाने के संभावित क्षेत्रों की पहचान

उपलब्धियां

  • स्टेट मीट आॅन प्रोमोटिंग स्पेश टेक्नोलाॅजी बेस्ड टूल्स एण्ड एप्लीकेशन इन गवर्नेन्स एण्ड डेवल्पमेंट।
  • ईयर आॅफ सांईनटिफिक अवेयनेस-2004।
  • वीनस ट्रानसिट-2004।
  • रीजनल ओरीएनटेशन वर्कशाॅप आॅन माइक्रोआरगेनिजमसः लेट अस ओबसर्व एण्ड लर्न।